उत्तर प्रदेश
भ्रष्टाचार पर CM योगी सख्त, अब तक करीब एक दर्जन IAS अधिकारियों को सस्पेंड किया!
21 Mar, 2025 07:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कभी यूपी में ताकतवर समझे जाने वाले आईएएस पर हाथ डालने से सरकारें बचा करती थीं, लेकिन सीएम योगी ने लीक से हटकर उन आईएएस अधिकारियों पर भी हाथ डालने से गुरेज नहीं किया, जो भ्रष्टचार में संलिप्त थे. ताजा मामला आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को निलंबित करने का है. 2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश वर्तमान में सचिव औद्योगिक विकास विभाग व इन्वेस्ट यूपी के CEO हैं. इस समय काफी महत्वपूर्ण विभाग उनके पास है. ऐसे में अभिषेक प्रकाश पर हुई कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है.
योगी सरकार के आठ साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के मामले में अब तक करीब एक दर्जन IAS अधिकारी निलंबित किए गए हैं. निलंबित आईएएस अधिकारियों में घनश्याम सिंह, देवी शरण उपाध्याय, टीके शीबू, सुनील वर्मा, देवेन्द्र पांडेय, अमर नाथ उपाध्याय, केदार सिंह, प्रेम प्रकाश सिंह, शारदा सिंह, जितेंद्र बहादुर सिंह, कुमार प्रशांत और अभिषेक प्रकाश हैं.
साल 2024 में अलीगढ़ में 35 भूखंडों के पट्टे मनमाने तरीके के बहाल करने का मामला सामने आया था. इसमें 2012 बैच के आईएएस अधिकारी देवीशरण उपाध्याय का नाम भ्रष्टाचार को लेकर सामने आया, जिसके बाद उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया. साल 2022 में सोनभद्र के डीएम टीके शीबू को सस्पेंड किया गया. पद का दुरुपयोग करने के मामले में औरैया के डीएम सुनील कुमार वर्मा को भी सस्पेंशन झेलना पड़ा. हालांकि इन दोनों अधिकारियों को भी अब बहाल कर दिया गया है.
उन्नाव के DM को किया था सस्पेंड
इस लिस्ट में उन्नाव में डीएम रहे देवेंद्र कुमार पांडेय का भी नाम है. उन पर शिक्षा विभाग में हुई खरीद में अनियमितता के आरोप लगे. महाराजगंज के डीएम अमरनाथ उपाध्याय को गो सरंक्षण में धांधली के आरोप में निलंबित किया गया. केदारनाथ सिंह को पर्यटन विभाग में रहते हुए और शारदा सिंह को भी ओबीसी कोटे पर भर्ती नहीं करने के आरोप में निलंबित किया गया.
साल 2018 में अनाज घोटाले में डीएम रहते हुए जितेंद्र बहादुर सिंह और सरकारी गेहूं खरीद में गड़बड़ी के आरोप में फतेहपुर के डीएम रहते हुए कुमार प्रशांत को भी सस्पेंड किया गया था. गोरखपुर शहर की सफाई-व्यवस्था में सुधार न होने और सफाई कर्मियों के आए दिन होते उग्र आंदोलन से नाराज सीएम योगी आदित्यनाथ ने नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश सिंह को निलंबित कर दिया था.
CM योगी की करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की नीति
वहीं, नगर आयुक्त को निलंबित करने के साथ उनका चार्ज डीएम को दे दिया गया था. इस मामले की जांच कमिश्नर को सौंपी गई. नगर आयुक्त पर बिना काम कराए ठेकेदारों को लाखों रुपए पेमेंट करने का भी आरोप लगा. इन तमाम बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई कर सीएम योगी ने ये संदेश दे दिया है कि करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू रहेगी और भ्रष्टाचार करने वाले चाहे कितने भी ताकतवर क्यों न हो उन पर कार्रवाई होगी.
आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज का भव्य स्मारक बनाने की योजना को मिली हरी झंडी
21 Mar, 2025 07:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में छत्रपति शिवाजी महाराज का भव्य स्मारक बनना की योजना को हरी झंडी मिल गई. महाराष्ट्र सरकार ने शिवाजी महाराज का भव्य स्मारक बनाने को लेकर शुक्रवार को एक शासनादेश (GR) जारी किया है. इसका ऐलान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही कर चुके हैं. उन्होंने आगरा के एक कार्यक्रम में पिछले महीने 19 फरवरी को ऐसी इच्छा जाहिर की थी.
छत्रपति शिवाजी महाराज का आगरा से गहरा नाता रहा है. क्रूर औरंगजेब ने शिवाजी महाराज को आगरा में राम सिंह की कोठी में नजरबंद कर दिया था. जहां से वे साल 1666 में अपने बेटे के साथ भाग निकले थे. अब महाराष्ट्र सरकार उसी जगह पर यूपी सरकार की मदद से शिवाजी महाराज का भव्य स्मारक बनाएगी. इसे लेकर सरकारी आदेश ऐसे समय में जारी हुआ है, जब नागपुर में औरंगजेब की कब्र को लेकर बवाल मचा है.
सरकार की ओर से जारी GR में क्या कहा गया?
महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी जीआर में बताया गया, ‘शिवाजी महाराज को मुगलों ने आगरा में कैद कर लिया था, लेकिन वे अपनी बुद्धिमत्ता और चतुराई से वहां से भाग निकले और महाराष्ट्र वापस आ गए. लेकिन वहां कोई स्मारक या प्रतीक नहीं दिखता. जब महाराष्ट्र के लोग उस जगह जाते हैं, तो उन्हें कोई प्रतीक नहीं दिखता. ऐसे में जिस जगह उन्हें कैद किया गया था, वहां पर भव्य स्मारक बनाया जाएगा.
इसमें कहा गया है कि शिवाजी महाराज महाराष्ट्र के आराध्य देवता हैं. उनकी वीर गाथा की प्रशंसा की जानी चाहिए. इस परियोजना के लिए राज्य पर्यटन विभाग द्वारा आवश्यक धनराशि आवंटित की जाएगी. इससे पहले महाराष्ट्र बजट सत्र के दौरान भी इस परियोजना पर चर्चा हुई थी. कहा जा सकता है कि यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की इच्छा है. जिसका जिक्र वे कई बार कर चुके हैं.
ताजमहल से भी आगे निकल जाएगा- फडणवीस
मुख्यमंत्री फडणवीस ने 19 फरवरी को आगरा में एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि एक बार आगरा में शिवाजी महाराज का भव्य स्मारक बन जाए तो यह पर्यटन स्थल के तौर पर दुनिया के सातवें अजूबों में से एक ताजमहल से भी आगे निकल जाएगा. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो मेरा नाम बदल देना. स्मारक के लिए यूपी सरकार जमीन मुहैया कराएगी.
बिहार में राष्ट्रगान के अपमान पर हंगामा, नीतीश कुमार से इस्तीफे की मांग तेज
21 Mar, 2025 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नीतीश कुमार के पटना कार्यक्रम के वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया. लालू यादव के बेटी रोहिणी आचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी की दिमागी सेहत के साथ कुछ तो जरूर गड़बड़ है ..! उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान के दौरान नीतीश कुमार ने राष्ट्रगान की मर्यादा के विपरीत आचरण किया. सदन में सत्र के दौरान निरंतर किए जाने वाले तरह-तरह के हास्यास्पद इशारे, दर्जनों दफा सार्वजनिक मंचों पर सरकारी कार्यक्रमों में अजीबोगरीब हरकतें की, अनेकों अमर्यादित, अभद्र और अश्लील बयान सुनने को मिले हैं.
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जी का बात-बात पर चीखना-चिल्लाना, उत्तेजित होना, तू-तड़ाक करना, विपक्ष के माननीय विधायकों, विधान-पार्षदों , बिहार की पूर्व व् प्रथम महिला मुख्यमंत्री के लिए अनादर सूचक शब्दों का इस्तेमाल करना, इन सबों से स्पष्ट है बिहार के माननीय मुख्यमंत्री जी की मानसिक स्थिति गंभीर चिंता का विषय है. उन्हें तुरंत डॉक्टर के देखरेख में सलाह की जरूरत है. इससे पहले की उनका मर्ज लाइलाज हो जाए, समय रहते उचित इलाज हो यही मुख्यमंत्री जी के साथ-साथ बिहार की सेहत के लिए भी बेहतर है.
बेटे को गद्दी सौंप दें नीतीश कुमार
राबड़ी देवी ने कहा कि नीतीश कुमार इस्तीफा देकर अपने बेटे निशांत कुमार को गद्दी सौंप दें. अगर यही अपमान लालू जी किए होते तो पता नहीं क्या हो जाता.
तेजस्वी यादव ने कहा कि सीएम ने पूरे राज्य का अपमान किया है. हमारा सिर शर्म से झुक गया है. सीएम ने राष्ट्रगान का अपमान किया है, बीजेपी चुप क्यों है? दो-दो डिप्टी सीएम हैं वो क्यों चुप हैं?
पीएम मोदी के लाडले सीएम नीतीश कुमार ने बिहारियों का माथा शर्म से झुका दिया है. कल की घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. देश में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने राष्ट्रगान का अपमान किया है. देश की जनता से माफी मांगे नीतीश कुमार.
हम लोगों ने स्पीकर से मिलकर इसपर बहस की मांग की है, इसका कार्यस्थान लाया है. मोदी जी के लाडले सीएम ने राष्ट्रगान का अपमान किया है. पीएम मोदी का माथा शर्म से झुका है कि नहीं?
नीतीश कुमार बिहार चलने लायक नहीं हैं, इनके ऊपर मुकदमा होना चाहिए. वेल में पहुंचकर विपक्ष की ओर से जोरदार नारेबाजी की गई. नीतीश कुमार भी सदन में मौजूद हैं. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्ष की ओर से जोरदार हंगामा किया गया. विपक्ष के हंगामे को देखते हुए विधानसभा की कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित.
राष्ट्रगान के दौरान हंसते नजर आए
पटना के एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार राष्ट्रगान के दौरान हंसते हुए नजर आए. उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद एक शख्स को बुलाया, तो राष्ट्रगान के समय वो भी असहज हो गए और राष्ट्रगान होने का इशारा किया. अब ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और आज सदन में विपक्ष के हंगामे का मुद्दा भी रहा
राष्ट्रगान का अपमान: नीतीश कुमार के खिलाफ मुजफ्फरपुर कोर्ट में मामला दर्ज
21 Mar, 2025 04:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के मुजफ्फरपुर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एसीजेएम पश्चिमी कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है. यह मुकदमा राष्ट्रगान के अपमान करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता के धारा 298, 352 राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम धारा 2, 3 के तहत दर्ज कराया गया है. पटना के एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान के दौरान मुख्यमंत्री अभिवादन करने का आरोप लगा था..
अधिवक्ता सूरज कुमार ने मुजफ्फरपुर एसीजेएम पश्चिमी कोर्ट में मामला दर्ज कराया है. राष्ट्रगान के अपमान करने के आरोप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर मामला दर्ज कराया गया है. अधिवक्ता सूरज कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 20 मार्च को सेपकटरा विश्वकप खेल के शुभारंभ के दौरान राष्ट्रगान हो रहा था.
उन्होंने कहा कि उस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रगान का अपमान किया. साथ ही प्रधान सचिव को भी अपमानित किया. मुख्यमंत्री के इस कृत्य से बिहार ही नहीं देश शर्मसार महसूस कर रहा है. इसी को लेकर न्यायालय में एक मुकदमा दायर कराया है.
मुजफ्फरपुर कोर्ट में सीएम पर केस दर्ज
उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता के धारा 298, 352 एवं राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम धारा 2, 3 के तहत मामला दर्ज कराया है.
अधिवक्ता सूरज कुमार ने बताया कि राष्ट्रगान का अपमान किसी के लिए अक्षम्य है.इसमें अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है. कोर्ट में सुनवाई के लिए अगली तिथि 28 मार्च को मुकर्रर किया गया है.
इस बीच राष्ट्रगान का आरोप करने के आरोप के मद्देनजर बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने शुक्रवार को विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में एनडीए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक दिन पहले राष्ट्रगान का कथित अपमान किया था.
विपक्ष ने सरकार विरोधी नारे लगाए और नीतीश कुमार से माफी की मांग की. उन्होंने नीतीश कुमार की एनडीए सहयोगी भाजपा के खिलाफ मामला दर्ज करने की भी मांग की.
विधानसभा-विधानसभा परिषद में हंगामा
गुरुवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को राष्ट्रगान के दौरान लोगों का अभिवादन करते देखा गया. इसके बाद, राष्ट्रगान के दौरान बिहार के सीएम के हिलने का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.शुक्रवार को विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी, जब राजद विधायकों ने अध्यक्ष नंद किशोर यादव की चेतावनी के बावजूद सदन में मौजूद नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की सदन के बाहर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कुमार पर राष्ट्रगान का अनादर करने का आरोप लगाया और सीएम के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाए.
आरजेडी ने राष्ट्रगान का अपमान करने का लगाया आरोप
तेजस्वी यादव ने कहा ने कहा कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कल राष्ट्रगान का अपमान किया और एक बिहारी होने के नाते मुझे शर्म आती है. सीएम राज्य के नेता हैं और कल की घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. भारतीय राजनीति के इतिहास में यह पहली घटना है जब किसी मुख्यमंत्री ने राष्ट्रगान का अपमान किया है. सीएम नीतीश कुमार को देश से माफी मांगनी चाहिए. सीएम को रिटायर हो जाना चाहिए.
आरजेडी नेता ने आगे कहा कि उन्होंने कथित घटना को लेकर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव भी दिया है और मामले पर बहस की भी मांग की है.
एलओपी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर किया, जिसमें नीतीश कुमार राष्ट्रगान बजने के दौरान मंच पर अपने मुख्य सचिव से बात करते नजर आ रहे हैं जब मुख्य सचिव ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो मुख्यमंत्री ने उनके हस्तक्षेप को नजरअंदाज कर दिया और अधिकारी को धक्का देते हुए अपनी बातचीत जारी रखी. बाद में, कुमार ने हाथ जोड़कर सामने खड़े लोगों का अभिवादन किया, जबकि मंच पर अन्य सभी राष्ट्रगान के लिए ध्यान में थे.
आरजेडी नेता ने एक्स पर लिखा, “आप कुछ सेकंड के लिए भी मानसिक और शारीरिक रूप से स्थिर नहीं हैं और इस तरह की बेहोशी की स्थिति में आपका इस स्थिति में होना राज्य के लिए बहुत चिंता का विषय है. बिहार का इस तरह बार-बार अपमान न करें.”
नीतीश सरकार का एयर कनेक्टिविटी मिशन, बिहार में हर स्थान होगा हवाई अड्डे से 200 किमी दूर
21 Mar, 2025 03:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में पिछले दो दशक में हवाई सेवाओं में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिली है. सूबे में हवाई संपर्क, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. राज्य अब हवाई यातायात के मानचित्र पर पहले से कहीं मजबूती से खड़ा है. साल 2005 में बिहार में केवल पटना और गया हवाई अड्डे ही थे. 2005-06 में बिहार के हवाई अड्डों से कुल 4,788 विमानों की आवाजाही हुई थी. करीब 2.48 लाख यात्रियों ने हवाई यात्रा की थी. जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 29,614 विमानों की आवाजाही और 42.86 लाख यात्रियों तक पहुंच गया.
मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा कि राज्य सरकार नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मार्गदर्शन और समन्वय में कार्य कर रही है. राज्य संसाधनों से हवाई अड्डों के विस्तार के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा रही है. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) आवश्यक बुनियादी ढांचे में जबरदस्त विकास कर रहा है. हमारा संकल्प है कि राज्य में कोई भी स्थान हवाई अड्डे से 200 किलोमीटर से अधिक दूर न हो.”
दरभंगा सिविल एन्क्लेव
दरभंगा सिविल एन्क्लेव, बिहार के उत्तरी क्षेत्र में स्थित एक अहम हवाई अड्डा है. यहां से कमर्शियल उड़ानों की शुरुआत 8 नवंबर 2020 को हुई. इसे केंद्र सरकार की उड़ान (UDAN) योजना के तहत विकसित किया गया. दरभंगा से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू की गईं. 2023-24 में यहां से 3,335 विमानों की आवाजाही और 5.26 लाख से अधिक यात्रियों का आवागमन हुआ.
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप इस हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है. बिहार कैबिनेट द्वारा 90 एकड़ अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण के लिए ₹245 करोड़ की स्वीकृति 10 जनवरी 2025 को प्रदान की गई है.
अन्य हवाई अड्डों का विकास
बिहार में हवाई संपर्क को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रगति हुई है. राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों और परियोजनाओं के तहत बिहार के विभिन्न हवाई अड्डों के विकास की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है.
1. रक्सौल ब्राउनफील्ड हवाई अड्डा
स्वीकृति: बिहार कैबिनेट द्वारा 10 जनवरी 2025 को 139 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को ₹207 करोड़ की लागत से स्वीकृति प्रदान की गई. यह हवाई अड्डा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के अधीन है और AAI द्वारा ही विकसित किया जाएगा.
2. बीरपुर हवाई अड्डा (सुपौल)
स्वीकृति: बिहार कैबिनेट द्वारा 4 फरवरी 2025 को 88.83 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को ₹42.37 करोड़ की लागत से स्वीकृति प्रदान की गई. यह हवाई अड्डा उड़ान (UDAN) योजना के तहत विकसित किया जाएगा.
3. पूर्णिया सिविल एन्क्लेव
विकास कार्य: पूर्णिया एयरपोर्ट (चूनापुर) के विकास को लेकर तेज़ी से कार्य हो रहा है, जिससे क्षेत्रीय संपर्क को मजबूती मिलेगी.
पूर्णिया शहर से एयरपोर्ट तक बेहतर पहुँच के लिए बिहार सरकार ने गोआसी से चूनापुर के बीच चार लेन सड़क परियोजना को मंज़ूरी दी है. इस परियोजना से यात्रियों के लिए एयरपोर्ट तक सुगम और तेज़ आवाजाही संभव होगी. इसका कुल बजट ₹14,86,21,000 है.
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) द्वारा अंतरिम सिविल एन्क्लेव के निर्माण का कार्य मार्च 2025 में शुरू कर दिया गया है. वहीं, एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल निर्माण का कार्य भवन निर्माण विभाग द्वारा दिया गया है और उसका कार्य भी मार्च 2025 में आरंभ हो चुका है.
यह परियोजना पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों के लिए हवाई संपर्क को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
4. बिहटा सिविल एन्क्लेव
परियोजना स्वीकृति: एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने बिहटा एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 459.99 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य का ऑर्डर दिया है. यह एयरपोर्ट निर्माण कार्य 2027 के अंत तक पूरा किया जाएगा.
पटना एयरपोर्ट पर यात्री दबाव अधिक है. बिहटा एयरपोर्ट इसके वैकल्पिक समाधान के रूप में विकसित किया जा रहा है.
इस एयरपोर्ट से A-321, B-737-800, A-320 जैसे बड़े विमानों का संचालन संभव होगा. नया टर्मिनल, यूटिलिटी बिल्डिंग, एयरसाइड रोड, टैक्सीवे, एयरफील्ड सिस्टम, सुरक्षा सिस्टम आदि शामिल होंगे. इससे बिहार को औद्योगिक और आर्थिक रूप से नई ऊंचाइयाँ मिलेंगी, और इमरजेंसी में उपयोगी होगा.
छोटे हवाई अड्डों का विकास
राज्य सरकार के स्वामित्व वाले भागलपुर, वाल्मीकिनगर, बीरपुर, मधुबनी, मुंगेर और सहरसा हवाई अड्डों के साथ-साथ भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के मुजफ्फरपुर हवाई अड्डे को उड़ान (UDAN) योजना के तहत विकसित करने के लिए बोलियाँ प्राप्त हुई हैं. विकास का उद्देश्य: इन हवाई अड्डों को 19 सीटों तक की क्षमता वाले छोटे विमानों के संचालन के लिए तैयार किया जाएगा.
नदी किनारे ससुर ने बहू को बुलाया, बुरी नियत से मिलने की कोशिश,लेकिन हुआ चौंकाने वाला खुलासा
21 Mar, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के कैमूर में कुछ दिन पहले 50 साल के शख्स की लाश चने के खेत से मिली थी. मामला हत्या का लग रहा था. पुलिस इस केस की जांच में जुटी थी. अब जाकर हत्याकांड की ये गुत्थी सुलझी है. शख्स की हत्या उसी की बहू ने की थी. बहू ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है. बहू ने इसके बाद कई चौंकाने वाले खुलासे भी किए.
घटना मुखराव गांव के बधार गांव की है. 50 वर्षीय रामाशीष बिंद की हत्या के मामले में पुलिस ने हैरान करने वाला खुलासा किया. पुलिस ने मृतक की बड़ी बहू गुड़िया देवी पति कुंज बिहारी बिंद को ही हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. फिर उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे भभुआ जेल भेज दिया गया. ससुर आरोपित बहु के साथ अवैध संबंध के लिए दबाव बना रहा था. यही हत्या की मुख्य वजह बना. तंग आकर गुड़िया ने अपने ससुर की हत्या कर दी.
ससुर कर रहा था ब्लैकमेल
थानाध्यक्ष रूबी कुमारी ने बताया कि घटनास्थल से बरामद रामाशीष बिंद के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाई गई. जांच में पता चला कि सुबह पांच बजे के करीब कॉल किया गया था. यही कॉल खुलासे की मजबूत कड़ी बना.पुलिस को पूछताछ के दौरान गुड़िया ने बताया कि उसका एक अन्य लड़के के साथ अफेयर था. इसकी भनक ससुर को हो हुई तो वह भी अवैध संबंध बनाने की मांग करने लगा. बहू ने इसका विरोध किया लेकिन ससुर मान ही नहीं रहा था. गुड़िया ने अपनी सास और ननद को भी इस बारे में जानकारी दी लेकिन सब उसे ही गलत ठहराने लगे. गुड़िया का पति बाहर रहता था.
नदी किनारे चने के खेत में बुलाया
होली में गुड़िया अपने मायके आ गई लेकिन उसका ससुर फोन कर उस पर मिलने का दबाव बनाता रहा. आखिरकार गुड़िया ने उसे मारने का प्लान बनाया. प्लान के मुताबिक, मंगलवार को तीन बजे अपने मायके से मुखराव के लिए निकली. शाम सात बजे ससुर बक्सर जिले के खीरी गांव उसे लेने गया. ससुर उसे नदी के किनारे चने के खेत में ले गया. इस दौरान उसने गुड़िया के साथ संबंध बनाए. गुड़िया ने मौका पाते ही ससुर की हत्या कर दी. फिर वहां से मायके आ गई. कपड़े बदल कर दोपहर को ससुराल मुखराव पहुंची और ससुर की मौत का मातम मनाने लगी. हालांकि पुलिस को हत्याकांड में अन्य लोगों के शामिल होने की आशंका है. पुलिस अभी भी इस मामले के जांच में जुटी है.
कोल्डड्रिंक के पैसे पर विवाद, बदमाशों ने केंद्रीय मंत्री के मामा पर फायरिंग की
21 Mar, 2025 03:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के केंद्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री तथा मुजफ्फरपुर के सांसद राजभूषण निषाद के मामा मलिक सहनी को गोली मारे जाने की घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैली हुई है. गोली उनके पैर में लगी है. एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. इस मामले में पुलिस भी अपनी जांच में लगी हुई है. पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है. उनसे पूछताछ की जा रही है. पुलिस घटना को लेकर जांच कर रही है. कई चीजों सामने आई हैं.
मिली जानकारी के अनुसार, बेगूसराय के चेरिया बरियारपुर में कुंभी गांव के पास भगवती स्थान चौक है. इसी चौक पर मलिक सहनी की नाश्ते और मिठाई की दुकान है. दुकान पर मलिक सहनी के साथ ही उनके बेटे भी बैठते हैं. बताया जाता है कि दो दिन पहले ही कुछ लोग इस दुकान पर सामान लेने आए हुए थे. तब मलिक सहनी के बेटे विकास दुकान पर थे. इस दौरान सामान लेने आए लोगों की मलिक सहनी के बेटे से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था.
कोल्डड्रिंक के दाम को लेकर हुआ विवाद
क्षेत्र में चल रही चर्चा के अनुसार, दुकान पर आये बदमाशों ने सामान तो ले लिया था, लेकिन वह उसका पैसा नहीं दे रहे थे. जिसका विरोध मलिक सहनी के बेटे ने किया था. विवाद शायद कोल्डड्रिंक के दाम को लेकर शुरू हुआ था. घायल मलिक सहनी ने बताया कि वह अपने दुकान पर ही थे. इसी दौरान अपराधी एक तरफ से आये और गोली मारते हुए दूसरी तरफ फरार हो गए. जब उन्होंने दुकान पर फायरिंग की, यानि उसके ऊपर फायरिंग की. गोली लगने से दुकान में रखा फ्रीज और मोटर में छेद हो गया.
पैर में लगी गोली
उन्होंने बताया कि गोली उनके पैर में लगी. मलिक सहनी ने कहा कि उनके बेटे के साथ कुछ लोगों की एक दिन पहले ही कहासुनी हुई थी. इसके बारे में उनके बेटे ने उन्हें जानकारी नहीं दी थी. उन्हें कुछ पता हीं नहीं कि क्या हो रहा है या नहीं हो रहा है? मलिक सहनी ने यह भी बताया कि उनके बेटे से जिन लोगों का विवाद हुआ था, वह शायद सामान नहीं देने के मसले पर हुआ था. उन्होंने तब धमकी भी दी थी.
बाइक पर आए थे तीन बदमाश
मिली जानकारी के अनुसार, मलिक सहनी पर फायरिंग करने वाले तीन बदमाश बाइक पर सवार होकर आये थे. इन सभी ने नकाब पहना हुआ था. उनके द्वारा गोली चलाये जाने पर दो गोलियां मलिक सहनी के पैर में लगी.पुलिस ने इस मामले को लेकर अपनी जांच को शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि बदमाशों की पहचान कर ली गई है. इन लोगों को अपने हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ भी कर रही है.
प्रयागराज में 346 कार्यों के प्रस्ताव के बावजूद इस वर्ष एक भी काम पूरा नहीं हुआ
21 Mar, 2025 02:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रयागराज में सभी विधायक और एम एल सी को मिला लिया जाए तो फरवरी तक कुल 346 कार्यों को दिया गया था, लेकिन इनका एक भी कार्य इस वर्ष पूरा नहीं हो सका. जिला ग्राम्य विकास अभिकरण की सूची इसकी हकीकत बयां कर रही है. प्रयागराज में विधायक निधि सबसे कम राशि खर्च करने वालों में फूलपुर विधायक दीपक पटेल हैं. पिछले महीने तक उनके खाते में विधायक निधि के पूरे पांच करोड़ रुपये बचे थे. हालांकि उप चुनाव में वो जीते थे. ऐसे में ये राशि खर्च नहीं हुई है.
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की तरफ से फरवरी तक फूलपुर विधायक के खाते से 34 लाख 97 हजार के दो कार्यों का प्रस्ताव दिया गया है. हालांकि दोनों ही काम अभी अपूर्ण हैं और निधि का उनके खाते में चार करोड़ 65 लाख रुपये बचे हुए हैं. इसके अलावा शहर उत्तरी से विधायक हर्षवर्धन बाजपेई ने इस साल अब तक केवल 59 लाख 69 हजार 200 रुपये का प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कुल छह कार्यों का प्रस्ताव दिया, जो सभी अपूर्ण हैं.
इन्होंने खर्च की सबसे अधिक विधायक निधि
प्रयागराज में विधायक निधि सबसे अधिक खर्च करने की बात की जाए तो फरवरी तक सबसे अधिक राशि हंडिया विधायक हाकिम लाल बिंद ने की है. उन्होंने पांच करोड़ रुपये में से चार करोड़ 92 लाख 75 हजार रुपये के 48 कार्यों के लिए बजट दिया है. हाकिम का अभी कोई काम पूर्ण नहीं है, लेकिन खाते में सात लाख 25 हजार रुपये ही शेष हैं. इसी तरह कोरांव विधायक राजमणि कोल सबसे अधिक विधायक निधि खर्च करने में दूसरे नंबर पर हैं. उन्होंने चार करोड़ 32 लाख 16 हजार रुपये खर्च किए हैं. उन्होंने कुल 46 कार्यों के लिए बजट दिया है.
अन्य विधायकों का हाल
इलाहाबाद दक्षिण से विधायक व कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने भी चार करोड़ 28 लाख 13 हजार रुपये के 44 कार्यों पर राशि दी है. उनके पास अभी 71 लाख 87 हजार रुपये बचे हैं. एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने चार करोड़ 16 लाख 53 हजार 400 रुपये 16 कार्यों पर खर्च किया था. इसके अलावा प्रतापपुर विधायक विजमा यादव ने चार करोड़ 12 लाख 44 हजार रुपये 15 कार्यों के लिए दिए हैं.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीनियर IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड किया
21 Mar, 2025 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करप्शन के मामले में सीनियर आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड कर दिया है. इसके साथ ही एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है, जो उद्योगपति से कमीशन की मांग कर रहा था. IAS अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड करने के साथ ही उन पर ‘वृहद दंड’ लगाने के लिए अनुशासनिक कार्यवाही की भी शुरुआत कर दी गई है. आइए जानते हैं कि IAS अभिषेक प्रकाश को कौन सा ‘वृहद दंड’ मिल सकता है?
पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा, ‘किसी भी अफसर को निलंबित करते वक्त उसके खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही की जाती है, उसमें दोषी पाए जाने पर ‘लघु दंड’ और ‘वृहद दंड’ का प्रावधान होता है… अभिषेक प्रकाश के मामले में वृहद दंड का जिक्र है… इसमें तीन तरह के दंड मिल सकते हैं, पहला- डिमोशन ऑफ रैंक… यानि अभी वह सचिव पद पर हैं, उन्हें डिमोशन देकर विशेष सचिव बनाया जा सकता है.’
‘अभिषेक प्रकाश को बर्खास्त भी किया जा सकता है’
पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बताया, ‘वृहद दंड में दूसरा दंड- तनख्वाह में बढ़ोतरी को रोका जाना होता है… यानि अभिषेक प्रकाश के ग्रेड-पे में बढ़ोतरी को रोका जा सकता है… तीसरा दंड- बर्खास्तगी हो सकती है… अगर अनुशासनिक कार्यवाही के दौरान अभिषेक प्रकाश के खिलाफ पुख्ता सबूत मिल जाता है तो सरकार उन्हें ‘वृहद दंड’ के रूप में बर्खास्त भी कर सकती है और अगर क्रिमिनल एक्ट में शामिल पाया जाता है तो FIR भी हो सकती है.’
नगालैंड कैडर में वापस भेजे जा सकते हैं अभिषेक प्रकाश?
वापस नगालैंड कैडर में भेजे जाने के सवाल पर पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बताया, ‘IAS अभिषेक प्रकाश की शादी यूपी कैडर की IAS अदिति सिंह के साथ हुई थी… ऐसे में उनके पास ऑप्शन था कि वह यूपी कैडर में आ जाएं या अदिति सिंह नगालैंड कैडर में चली जाएं… अभिषेक प्रकाश ने यूपी कैडर में आने का फैसला किया और DOPT ने उनका कैडर बदलकर यूपी कर दिया है… अदिति सिंह से तलाक के बाद भी अब कैडर में बदलाव की संभावना नहीं है.’
क्यों सस्पेंड किए गए IAS अभिषेक प्रकाश?
गौरतलब है कि सस्पेंड होने से पहले तक आईएएस अफसर अभिषेक प्रकाश, यूपी इंवेस्ट के सीईओ के साथ ही औद्योगिक विकास विभाग के सचिव पर तैनात थे. उनके जिम्मे ही यूपी में निवेश के लिए कंपनियों को लाना और उन्हें सहूलियत प्रदान करना था. IAS अभिषेक प्रकाश ही उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले सभी फर्म को समीक्षा के बाद letter of comfort issue करते थे.
सीएम योगी ने कराई थी गोपनीय जांच
यूपी में निवेश के लिए SAEL solar P6 प्राइवेट लिमिटेड ने आवेदन किया था. कंपनी के मालिक विश्वजीत दत्ता का आरोप है कि वह उत्तर प्रदेश में सोलर सेल, सोलर पैनल, व सोलर प्लांट के पुर्जे बनाने की फैक्ट्री लगाना चाहते हैं लेकिन 5% कमीशन नहीं देने के कारण कमेटी की संस्तुति के बावजूद पत्रावली में प्रकरण टाल दिया जाता है और अभिषेक प्रकाश ने उनसे मिस्टर जैन से मिलने को कहा और साफ कहा कि जैन साहब चाहेंगे तो संस्तुति होगी.
निकांत जैन को पुलिस ने कर लिया गिरफ्तार
शिकायतकर्ता विश्वजीत दत्ता ने जब निकांत जैन से मुलाकात की तो जैन ने 5% कमीशन की डिमांड रखी. इसके बाद विश्वजीत दत्ता ने अपनी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कर दी. सीएम योगी ने तुरंत ही गोपनीय जांच बैठा दी. जांच में पत्रावली पर की गई तारीखवार टिप्पणी और अफसरों से पूछताछ के बाद गोमती नगर थाने में निकांत जैन पर विश्वजीत दत्ता की तहरीर पर एफआईआर दर्ज करवाई गई और निकांत जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.
कौन हैं IAS अभिषेक प्रकाश?
निकांत जैन की गिरफ्तार के बाद 2006 बैच के आईएएस अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया गया. अभिषेक प्रकाश की गिनती एक दौर में सीएम योगी के करीबी अफसरों में हुआ करती थी. वह तीन साल तक राजधानी लखनऊ के डीएम रहे. इस दौरान एक साल तक एलडीए का चार्ज भी अभिषेक प्रकाश के पास था. लखनऊ के डीएम रहते हुए डिफेंस एक्सपो की जमीन अधिग्रहण में करप्शन का आरोप भी अभिषेक प्रकाश पर लगा था, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही न हुई.
झारखंड के मंत्री के फेसबुक पेज को हैक कर डाला अश्लील सामग्री
21 Mar, 2025 02:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झारखंड सरकार के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का फेसबुक पेज हैक हो गया है. गुरुवार को उनके ऑफिशियल पेज से अश्लील और आपत्तिजनक पोस्ट शेयर किए गए, जिससे उनके समर्थक और आम जनता हैरान रह गई, मंत्री के फेसबुक पेज पर 24 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं. जैसे ही मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और उनकी टीम को इस घटना की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत फेसबुक पेज को रिकवर करने की कोशिश शुरू कर दी. लेकिन, उन्हें अपना एडमिन एक्सेस नहीं मिल पाया.
इसे लेकर रांची स्थित लालपुर साइबर थाने में लिखित शिकायत की गई है. मंत्री के फेसबुक पेज का ऑपरेशन संभालने वाले रांची के कोकर निवासी ओमप्रकाश रमण ने शिकायत में कहा है कि इस पेज में सुदिव्य कुमार सोनू और गोपाल विश्वकर्मा को एडमिन का पावर था. अचानक सभी एडमिन का पावर खत्म कर दिया गया. साइबर पुलिस से इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है.
गुरुवार तक मंत्री के फेसबुक पेज पर किया गया अश्लील पोस्ट भी नहीं हटाया जा सका था. शुक्रवार को यानि आज पोस्ट हटाने की कोशिश जारी है. इस पर शाम सात बजे तक 130 से ज्यादा लोगों के कमेंट आए हैं. मंत्री के समर्थक तमाम यूजर्स से पोस्ट को नजरअंदाज करने और इस संबंध में फेसबुक को रिपोर्ट करने का अनुरोध कर रहे हैं.
फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया
पिछले महीने भी साइबर अपराधियों ने झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता का फोटो इस्तेमाल कर फर्जी फेसबुक अकाउंट बना लिया था और इसके जरिए आम लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजे गए थे. मामला तब उजागर हुआ जब इस फर्जी फेसबुक अकाउंट में डीजीपी अनुराग गुप्ता के नाम की स्पेलिंग गलत होने पर कुछ लोगों ने पुलिस का ध्यान आकृष्ट कराया.
पहले भी हो चुके हैं ऐसे कांड
पुलिस का साइबर सेल इस मामले की तहकीकात कर रहा है. झारखंड के पूर्व डीजीपी आईपीएस नीरज सिन्हा के साथ-साथ कुछ आईएएस अधिकारियों के भी फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर ठगी की कोशिश के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन किसी मंत्री का सोशल मीडिया पेज हैक कर लिए जाने की यह पहली घटना है.
बीजेपी के बाद कांग्रेस ने भी 2027 चुनाव के लिए बिछाई सियासी बिसात
21 Mar, 2025 02:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में है, लेकिन सियासी बिसात अभी से ही बिछाई जाने लगी है. बीजेपी के बाद कांग्रेस ने भी यूपी में अपने जिला और महानगर अध्यक्षों के नाम का ऐलान कर दिया है. यूपी कांग्रेस कमेटी ने गुरुवार को 133 जिला और शहर अध्यक्षों के नामों की घोषणा कर 2027 चुनाव के लिए अपने सेनापति को उतार दिया है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के एजेंडे पर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की टीम कितनी फिट बैठती है. कांग्रेस के लिए बंजर बन चुकी यूपी की जमीन पर क्या सियासी फसल लहरा पाएंगे?
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने दिसंबर में उत्तर प्रदेश में अपने सभी फ्रंटल संगठनों सहित जिला अध्यक्षों और शहर अध्यक्षों को भंग कर दिया था. इसके बाद 100 दिन में दोबारा से पार्टी संगठन बनाने की बात कही थी. इसके बाद से बी पार्टी अपने संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया में लगी हुई थी. पार्टी राष्ट्रीय महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल की तरफ से गुरुवार खाम सभी नए जिला अध्यक्षों और शहर अध्यक्षों की सूची जारी की गई है. कांग्रेस के पुनर्गठन में प्रियंका गांधी के करीबी नेताओं का ख्याल रखा गया है तो राहुल गांधी के सामाजिक न्याय वाले एजेंडे को भी अमलीजामा पहनाने की कवायद की गई है.
राहुल गांधी के एजेंडे पर कांग्रेस का फोकस
यूपी की जिला और शहर अध्यक्ष के चयन में कांग्रेस ने राहुल गांधी के सामाजिक न्याय-पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय का पूरा ख्याल रखा गया है. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्षों को मिलाकर कांग्रेस ने 133 पदाधिकारी घोषित किए हैं, जिसके जरिए नई सोशल इंजीनियरिंग बनाने की कोशिश की है. कांग्रेस के 133 जिला और शहर अध्यक्षों में 85 जिला-शहर अध्यक्ष ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, जो 65 फीसदी के करीब है. कांग्रेस ने 49 सवर्ण जातियों से आने वाले नेताओं को नियुक्ति की है तो 20 दलित समुदाय से हैं.
कांग्रेस ने ब्राह्मण समाज का रखा ख्याल
कांग्रेस के बनाए नए जिला और शहर अध्यक्ष की फेहरिश्त देखें तो 49 सवर्ण जातियों से हैं, जिसमें सबसे ज्यादा ब्राह्मण समाज से हैं. 27 ब्राह्मण नेताओं को जिले और शहर की कमान कांग्रेस ने सौंपी है. कांग्रेस ने 19 फीसदी हिस्सेदारी ब्राह्मण समाज को दी है. इसके बाद दूसरा नंबर ठाकुर समुदाय का आता है, ठाकुर समुदाय से 12 जिला और शहर अध्यक्ष बनाए गए हैं. वैश्य समाज से पांच और दो कायस्थ समुदाय के नेताओं की नियुक्ति की है. इसके अलावा तीन भूमिहार समाज से शहर-जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं. कांग्रेस ने 35 फीसदी हिस्सेदारी सवर्णों समाज के नेताओं की दी है, जिसमें ब्राह्मण 29 फीसदी, ठाकुर 9 फीसदी, वैश्य 3 फीसदी और अन्य सवर्ण करीब 3 फीसदी हैं.
गांधी परिवार के गढ़ और राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पंकज तिवारी को दोबारा से जिला अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है तो धीरज श्रीवास्तव को दोबारा से शहर अध्यक्ष बनाया गया है. कांग्रेस ने पहली बार इतनी कम संख्या में ब्राह्मण समाज से जिला-शहर अध्यक्ष बनाए गए हैं. अमेठी में जिला अध्यक्ष की कमान प्रदीप सिंघल को फिर सौंपी गई है जबिक शहर अध्यक्ष के नाम का ऐलान नहीं किया गया. रायबरेली में करीब तीन दशक से ब्राह्मण समाज से ही जिला अध्यक्ष बनते आ रहे हैं जबकि जिले में दलित और ओबीसी की संख्या काफी ज्यादा है.
PDA फार्मूला पर कांग्रेस का फोकस
कांग्रेस ने जिला और शहर अध्यक्ष के चयन में पीडीए फार्मूले यानि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय का ख्याल रखा है. कांग्रेस ने 85 जिला-शहर अध्यक्ष इन्हीं तीनों समुदाय से बनाए हैं, जो 65 फीसदी के करीब है. कांग्रेस ने 48 ओबीसी समाज से जिला और शहर अध्यक्ष बनाए हैं, जिसमें 33 हिंदू ओबीसी, 15 मुस्लिम ओबीसी समुदाय के नेताओं को कमान सौंपी गई है. हालांकि, मुस्लिम समुदाय से कुल 32 सदस्यों की नियुक्ति की गई है, जिसमें 17 जनरल जाति के मुस्लिम और 15 ओबीसी मुस्लिम हैं. इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से 20 जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं, जिनमें 19 दलित और एक आदिवासी समुदाय से हैं.
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिस तरह से संगठन में दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक को 65 फीसदी हिस्सेदारी दी है, उससे एक बात साफ है कि राहुल गांधी के सामाजिक न्याय वाले एजेंडे को संगठन में अमलीजामा पहनाने की कवायद की गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी पीडीए के एजेंडे पर ही अपनी सियासी बिसात बिछा रहे हैं तो बीजेपी ने भी अपने संगठन में दलित और ओबीसी को खास तवज्जे दी है. ऐसे में कांग्रेस ने भी दलित और ओबीसी के साथ मुस्लिम समीकरण का दांव चला है. लोकसभा चुनाव में सपा को पीडीए फॉर्मूले से जबरदस्त सफलता मिली थी और कांग्रेस भी गठबंधन का हिस्सा थी. ऐसे में अब कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव के पहले पीडीए फार्मूले से यूपी में अपनी खोई जमीन तलाशने की कोशिश में है.
कांग्रेस संगठन पर प्रियंका गांधी की छाप
उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में हर के बाद कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी को राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाकर भेजा था. पर उनके नेतृत्व में 2022 के चुनाव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में मिली करारी हार के बाद यह माना जा रहा था कि प्रदेश में अब उनके और उनके लोगों को जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. पर कांग्रेस की ओर से जारी 133 जिला व शहर अध्यक्षों की सूची में प्रियंका गांधी की चली है. इस सूची में ज्यादातर जिला अध्यक्षों और शहर अध्यक्षों के तौर पर प्रियंका गांधी की टीम में के लोगों को जिम्मेदारी दी गई है.मथुरा शहर की जिम्मेदारी कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी रहे मुकेश धनगर को जिला अध्यक्ष बनाया है जबकि आगरा जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी लोकसभा प्रत्याशी रहे रामनाथ सिकरवार को दी गई है.
लखनऊ जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी रुद्र दमन सिंह बबलू को दी गई है. जबकि शहर अध्यक्ष पर कोई बदलाव नहीं किया गया है लखनऊ शहर अध्यक्ष डॉ शहजाद और अमित त्यागी को ही बनाया गया है. कानपुर नगर की बात करें तो महानगर की जिम्मेदारी पवन गुप्ता को सौंपी गई है जबकि कानपुर देहात की जिम्मेदारी अमित सिंह गौर को दी गई है. कांग्रेस की जिला अध्यक्षों और शहर अध्यक्षों की सूची में प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रभारी अविनाश पांडे के लोगों को तवज्जो ना के बराबर मिली है केवल बनारस आसपास के जिलों में ही अजय राय अपने अनुसार जिला अध्यक्ष नगर अध्यक्ष बनवाने में सफल हुए है.
कांग्रेस ने युवा नेताओं को दिया तवज्जो
कांग्रेस ने शहर और जिला अध्यक्ष की नियुक्त में युवा चेहरों को खास तवज्जे दी है. 133 शहर और जिला अध्यक्ष की फेहरिश्त देखें तो 84 नेताओं की उम्र 21 साल से 50 साल के बीच है. 21 से 40 साल के उम्र के 25 नेताओं को जिला-शहर अध्यक्ष बनाया गया है जबकि 41 साल से 50 साल के उम्र के 59 नेताओं को शहर व जिले की कमान सौंपी गई है. 51 से 60 साल के 40 नेताओं को संगठन में जिले की कमान सौंपी गई है जबकि 61 साल से ज्यादा उम्र के 7 नेता हैं, जिनमें 2 नेताओं की उम्र 70 साल से ज्यादा है. इस तरह कांग्रेस ने जिला और शहर अध्यक्ष बनाने में उम्र का खास ख्याल रखा है, औसतन उम्र 47 साल है. कांग्रेस ने 2027 के लिहाज से युवा टीम का गटन किया है.
अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट का खुलासा,ऑन डिमांड स्पा और शराब का धंधा समिट बिल्डिंग में चलाता था गैरकानूनी कारोबार
21 Mar, 2025 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूपी के लखनऊ से एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है. राज्य की राजधानी के पॉश इलाके में देह व्यापार का धंधा चल रहा था. आरोपी की पहचान शक्ति सिंह के रूप में हुई है. आरोपी थाईलैंड की लड़कियों को बुलाकर अपने फ्लैट में रखता था. थाईलैंड की लड़कियां 90 दिन के टूरिस्ट वीजा पर भारत आती हैं और फिर वीजा खत्म होने पर एक हफ्ते के लिए वापस चली जाती थी.
पुलिस ने बताया कि आरोपी थाईलैंड की लड़कियों से अपने नाइट क्लब में काम करवाता था. लड़कियां क्लब में शराब सर्व करने का काम करती थीं. साथ ही हाई प्रोफाइल ग्राहकों को रिझाती थी. ऐसे में जो भी ग्राहक लड़की चुनता था आरोपी रेट फिक्स होने पर उसको भेज देता था. थाईलैंड की लड़कियां मसाज पार्लर, स्पा में भी काम करती थी.
अपार्टमेंट में पकड़ी गईं लड़कियों ने किया खुलासा
पुलिस ने बताया कि आरोपी के इस काम का खुलासा उसी के अपार्टमेंट में पकड़ी गईं 10 थाई लड़कियों ने किया है. पुलिस ने बताया कि शक्ति सिंह ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी से MBA किया और वह फैजाबाद का रहने वाला है. लोगों को दिखाने के लिए शक्ति रियल एस्टेट का काम करता है. शक्ति की ‘श्री साईं रियल इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से कंपनी भी है, जो दिसंबर 2022 में शुरू हुई है. कंपनी के निदेशक साधना सिंह और शक्ति सिंह हैं.
हाई-प्रोफाइल दलालों का नेटवर्क है एक्टिव
पुलिस से मिली जानकारी थाईलैंड में इन लड़कियों को धोखा देकर धंधे में धकेला जाता था. लड़कियों को लखनऊ लाने के लिए हाई-प्रोफाइल दलालों का नेटवर्क एक्टिव है. लड़कियों को पहले लालच दिया जाता था, फिर धोखा देकर देह व्यापार के धंधे में शामिल कर लिया जाता था. शक्ति हाइट्स में छापेमारी के दौरान जिन लड़कियों को पकड़ा गया है, पुलिस उनके रजिस्टर और दस्तावेजों की जांच कर रही है. इसके अलावा ये भी पता किया जा रहा है कि लड़कियां कितने समय से लखनऊ में रह रही थी और कितनी बार लखनऊ आ चुकी हैं.
पुलिस ने बताया कि शक्ति ने मल्हौर रोड पर बिना नक्शा पास कराए चार अपार्टमेंट बनाए है, जिसमें वो थाईलैंड की लड़कियों को रखता था. इसके अलावा पुलिस ने बताया कि कि शक्ति सिंह के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं. सिंह के खिलाफ अवैध निर्माण और बिजली चोरी के भी कई मामले दर्ज हैं.
घर से सामान लेने गया बच्चा कुत्तों के चंगुल में फंसा, दर्दनाक मौत
20 Mar, 2025 08:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूपी के मुरादाबाद के कुंदरकी थाना इलाके में जंगली कुत्तों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. ताजा मामला कुन्दरकी थाना इलाके के ही मोहम्मद जमापुर गांव का है, जहां एक 7 साल के मासूम छात्र अब्दुल की कुत्तों के हमले में मौके पर ही मौत हो गई. बच्चा घर से चीज लेने के लिए निकला था. इसी दौरान जंगली कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया. बच्चा जब घर नहीं पहुंचा तो परिवार के लोग काफी घबरा गए. इस दौरान उन्होंने जब बच्चे की तलाश शुरू की तो उसका शव आम के बाग के पास खून से लथपथ पड़ा हुआ मिला.
मुरादाबाद के कुंदरकी इलाके में एक सात साल के मासूम अब्दुल की कुत्तों के हमले में मौत हो गई. अब्दुल घर के पास ही सरकारी स्कूल में दूसरी क्लास का छात्र था. वह घटना वाले दिन स्कूल गया था और क्लास पूरी होने के बाद घर लौटा था. इसके बाद वह चीज लेने के लिए घर से निकला था. इसी बीच आम के बाग के पास उसे करीब एक दर्जन जंगली कुत्तों ने उसे घेर लिया. इसके बाद उन कुत्तों ने अब्दुल पर हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया, जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
खून से लथपथ मिला बच्चे का शव
चीज लेने के लिए घर से निकला बच्चा जब घर नहीं पहुंचा तो परिवार के लोग काफी परेशान हो गए. घर वालों ने तुरंत बच्चे को ढूंढना शुरू किया. इस बीच देर शाम अब्दुल का शव खून से लथपथ आम के बाग के पास मिला. इसके बाद गांववालों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी. मामले की जानकारी होते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और उन्होंने फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया. पुलिस ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
कुत्तों के हमले में बच्चे की मौत
तमाम लोगों ने कुत्तों को वहां से भगा दिया था, लेकिन तब तक मासूम बच्चे की मौत हो गई थी. मामले की जानकारी देते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुंदरकी थाना क्षेत्र के जमापुर गांव में तकरीबन 6:30 बजे एक बच्चे की डेड बॉडी मिलने की सूचना पुलिस को प्राप्त हुई थी. सूचना मिलते ही कुंदरकी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई थी. यहां एक 7 साल के बच्चा का शव मिला है. प्रथम दृष्टि या लग रहा है कुछ कुत्तों के हमले में बच्ची की मौत हो गई है.
गांव में कुत्तों का आतंक
गांववालों के अनुसार क्षेत्र में जंगली कुत्तों का आतंक लंबे समय से है, आए दिन जंगली कुत्ते जानवरों को भी अपना शिकार बनाते रहते हैं. मृतक बच्चे के परिजन ने बताया गया कि बच्चा पढ़ने के लिए स्कूल गया था. स्कूल से घर आने के बाद बच्चा चीज लेने के लिए पैसे लेकर घर से निकला था. इसी बीच दुकान पर जाते समय पता नहीं वह कहीं निकल गया था. इसी बीच कुत्तों के हमले में उसकी मौत हो गई.
इन्वेस्ट यूपी के सीईओ की मुश्किलें बढ़ीं, सीएम योगी ने सस्पेंड कर एफआईआर दर्ज करवाई
20 Mar, 2025 06:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ. यूपी के सीनियर IAS अभिषेक प्रकाश को सीएम योगी ने सस्पेंड कर दिया. डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ी के आरोपों के बाद यह फैसला लिया गया. औद्योगिक विकास विभाग के सचिव और इन्वेस्ट यूपी के CEO अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के आईएएस अफसर हैं. लखनऊ डिफेंस एक्सपो जमीन घोटाले में भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के आरोप सामने आए हैं. यह मामला भटगांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है. मुआवजे के नाम पर अनियमितताओं के चलते तत्कालीन DM लखनऊ, IAS अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया. जांच जारी है. उद्यमी की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है.
अभिषेक प्रकाश लखीमपुर खीरी, बरेली, हमीरपुर और लखनऊ के डीएम रह चुके हैं. स्पेशल सेक्रेटरी होम डिपार्टमेंट, मेरठ में एमडी वेस्टर्न इलेक्ट्रिक डिपार्टमेंट, डायरेक्टर नेडा, स्पेशल सेक्रेटरी यूपी मेडिकल, हेल्थ एंड फैमली वेलफेयर डिपार्टमेंट रह चुके हैं.
निकांत जैन एक बिचौलियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोप है की सोलर इंडस्ट्री लगाने के लिए उद्यमी ने किया था. इन्वेस्ट यूपी में आवेदन काम कराने के लिए वसूलीबाज आरोपी जैन ने कमीशन मांगा था.
इलाहाबाद हाई कोर्ट का विवादास्पद आदेश: छाती पर हाथ रखना और नाड़ा खोलना रेप की श्रेणी में नहीं
20 Mar, 2025 06:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के लोगों का कोर्ट में काफी विश्वास है. अगर किसी के साथ कुछ गलत हुआ है तो वो न्याय के लिए इसी कोर्ट पर आश्रित हो जाता है. कोर्ट में जज भी मामले के हर पहलु को देखते हुए ही किसी केस पर सुनवाई करते हैं. लेकिन कई बार कुछ मामलों में ऐसे फैसले लिए जाते हैं, जिसके बाद बवाल मच जाता है. इन दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक ऐसे ही फैसले ने बवाल मचाया हुआ है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक नाबालिग के साथ कथित बलात्कार के केस पर जज ने ऐसा बयान दिया, जिसके बाद बहस छिड़ गई. दो लड़कों ने एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़खानी की थी. पवन और आकाश नाम के इन आरोपितों ने नाबालिग के निजी अंग छुए थे. इसके बाद पायजामा खोल दिया था. गनीमत थी कि आसपास के लोगों ने बच्ची की चीख सुन ली और उसे बचा लिया. इसके बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया था, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 18 के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे. लेकिन आरोपियों ने अपने ऊपर लगी धाराओं के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी.
क्या कहा कोर्ट ने?
आरोपियों द्वारा दायर की गई याचिका पर कोर्ट के जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों के खिलाफ रेप के केस नहीं दर्ज किये जा सकते. उन्होंने सिर्फ नाबालिग की छाती को छुआ था और उसके पायजामे की डोर खोली थी. जब राहगीरों ने उन्हें पकड़ा तो उन्होंने नाबालिग को छोड़ दिया. ऐसे में बलात्कार हुआ ही नहीं. इस स्थिति में रेप का केस बनता ही नहीं है.
मच गया बवाल
हाई कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद बवाल मच गया है. कई सामाजिक संगठन इस टिप्पणी के खिलाफ उतर आए हैं. सबका यही कहना है कि क्या नाबालिग की छाती को छूना और नाड़ा खोलना इस बात का प्रमाण नहीं है कि अपराधियों की क्या थी. वो लड़की की किस्मत थी कि लोगों ने उसे बचा लिया वरना उसके साथ दुष्कर्म होना तय था. ऐसे में आरोपियों को यूं ही रेप के इल्जाम से मुक्त करना समाज में एक बहुत गलत संदेश देगा.